1 जुलाई से ही लागू होगी GST, लेकिन रिटर्न दाखिल करने में 2 माह की छूट

1 जुलाई से ही लागू होगी GST, लेकिन रिटर्न दाखिल करने में 2 माह की छूट

देश में 30 जून की आधी रात के बाद माल और सेवा कर (जीएसटी) की नई व्यवस्था लागू कर दी जाएगी। लेकिन पहले दो महीने तक कर रिटर्न को दाखिल करने के नियमों में थोड़ी ढील देने का फैसला किया गया है। इसका मकसद व्यापारियों को नई प्रणाली को अपनाने में प्रारंभिक दिक्कतों से निबटने में सहूलियत देना है। जीएसटी परिषद की यहां बैठक के बाद वित्तमंत्री ने जीएसटी को लागू करने के कार्यक्रम को कुछ और समय टालने की उद्योग और व्यापार जगत की मांग को नामंजूर करते हुए कहा कि अब इसके लिए गुजाइंश नहीं बची है। उन्होंने देश को भरोसा दिलाया कि जीएसटी के लिए सूचना प्रौद्योगिकी का बुनियादी ढांचा पूरी तरह जांचा-परखा जा बाकी पेज 8 पर चुका है। जीएसटी के लिए सारी प्रणालियां तैयार हैं। वित्तमंत्री ने कहा जीएसटी को तीस जून की आधी रात को लागू कर दिया जाएगा। जीएसटी परिषद की रविवार को हुई 17वीं बैठक में वातानुकूलित होटल परिचालकों को राहत देते हुए 7,500 रुपए तक के किराए वाले कमरों के बिल पर 18 फीसद की दर से कर लगाने का फैसला किया गया। उससे अधिक के कमरों के किराए पर 28 फीसद की दर से जीएसटी लगाया जाएगा। पहले पांच हजार रुपए से अधिक के एसी कमरों के बिल पर 28 फीसद की दर से कर लगाने का प्रावधान किया गया था। बैठक में सरकारी लॉटरी पर 12 फीसद और सरकारों से अधिकृत लॉटरी पर 28 फीसद कर लगाने का फैसला लिया गया। संशाधित नियमों के मुताबिक जुलाई के लिए संशोधित रिटर्न फाइलिंग के तहत बिक्री का ब्योरा 10 अगस्त के बजाए अब पांच सितंबर तक दाखिल कराया जा सकता है। कंपनियों को अगस्त के अपने बिक्री इनवायस जीएसटी नेटवर्क पर 10 सितंबर के बजाए 20 सितंबर तक जमा करना होगा।

जेटली ने कहा, ‘किसी तरह की शिकायत या तैयारी में कमी को ध्यान में रखते हुए पहले दो महीने (जुलाई-अगस्त) के रिटर्न को दाखिल करने के मामले में थोड़ी मोहलत दी गई है। इसके बाद भी यदि कोई कहता है कि वह तैयार नहीं है तो वह यह उसका जोखिम है।’ उन्होंने कहा कि इस अंतरिम अवधि में रिटर्न फाइल करने में देरी को लेकर कोई जुर्माना नहीं लगाया जाएगा। कारोबारियों को स्वत: घोषणा के आधार पर रिटर्न भरने होंगे। वित्तमंत्री ने यह भी बताया कि परिषद ने जीएसटी पर एडवांस रूलिंग (अग्रिम व्यवस्था), अपील और पुनरीक्षण, आकलन, मुनाफाखोरी निरोधक व्यवस्था और कोष के निपटान से संबंधित छह तरह के नियमों को भी मंजूरी दी है।सूत्रों ने बताया कि जीएसटी के तहत पांच सदस्यों वाले मुनाफाखोरी निरोधक प्राधिकरण का गठन किया जाएगा। यह मामलों को सुरक्षा निदेशालय (डीजीएस) के पास जांच के लिए भेजेगा। जहां तक ई-वे विधेयक का प्रश्न है तो जीएसटी परिषद में इस पर सहमति नहीं बन पाई थी। राज्यों को फिलहाल एक राज्य से दूसरे राज्य में जाने वाली वाणिज्यिक वस्तुओं के बारे में वर्तमान व्यवस्था को जारी रखने की छूट दी गई है। जेटली ने कहा, ‘परिषद में दो तरह की राय थी। इस पर आगे और चर्चा की जाएगी। तबतक के लिए राज्यों को मौजूदा व्यवस्था जारी रखने की छूट होगी।’ इस संबंध में जीएसटी परिषद की 30 जून को होने वाली बैठक में या उसके बाद फैसला हो सकता है।

ई-वे बिल के मसौदे के मुताबिक 50 हजार रुपए से ऊपर के किसी माल को एक राज्य से दूसरे राज्य में ले जाने के लिए जीएसटी नेटवर्क (जीएसटीएन) में पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा, ताकि कर चोरी न हो। सूत्रों के मुताबिक ई-वे के लिए बुनियादी सुविधा तैयार करने में कम से कम दो महीने लगेंगे।जेटली ने कहा कि मौजूदा उत्पाद शुल्क, सेवा कर और वैट व्यवस्था के तहत पंजीकृत 80.91 लाख पंजीकृत करदाता इकाइयों में से 65.6 लाख यानी 81.1 फीसद इकाइयां जीएसटीएन पोर्टल में अपना पंजीकरण करा लिया है। पंजीकरण का काम 15 जून को बंद हो गया था। उसे 25 जून को फिर खोला जाएगा और यह सारा काम संतोषजनक ढंग से चल रहा है। जेटली ने कहा, ‘जीएसटीएन पर जाने के लिए कारोबारियों को हड़बड़ी करने की जरूरत नहीं है। उनकी अस्थायी पहचान संख्या वही होगी जो जीएसटीआइएन पहचान संख्या है। नए कारोबारियों के लिए भी जल्दबाजी नहीं है क्योंकि उन्हें जीएसटीएन के लिए 30 दिन का मौका मिलेगा।’

परिषद ने विशेष श्रेणी के राज्यों में अधिकतम 50 लाख रुपए तक के सलाना कारोबार करने वाली इकाइयों को कंपोजिशन (एकमुश्त शुल्क की आसान व्यवस्था) में रखने का फैसला किया है लेकिन उत्तराखंड के लिए यह सीमा 75 लाख रुपए होगी। जेटली ने कहा कि उत्तराखंड और जम्मू कश्मीर को छोड़कर पूर्वाेत्तर राज्यों और हिमाचल प्रदेश सहित अन्य पहाड़ी राज्यों में एकमुश्त कर योजना के लिए कारोबार की अधिकतम सीमा 50 लाख रुपए का फैसला किया गया है। जिन राज्यों ने जीएसटी विधेयक पारित नहीं किया है, उनके बारे में पूछे जाने पर वित्त मंत्री ने कहा, ‘ऐसे तीन राज्य ही बचे हैं। तमिलनाडु विधानमंडल की बैठक कल होगी। पश्चिम बंगाल ने अध्यादेश पहले ही पारित कर दिया और उम्मीद है कि पंजाब और केरल इसे पारित कर देंगे। उसके बाद सिर्फ जम्मू कश्मीर बचता है। उसे छोड़ कर सभी राज्य अगले हफ्ते के अंततक यह काम पूरा कर लेंगे।’