आज भी याद आता है वो सिर पर पट्टी बांधकर खेलना और विरोधियों को धूल चटाना

आज भी याद आता है वो सिर पर पट्टी बांधकर खेलना और विरोधियों को धूल चटाना

टीम इंडिया के पूर्व महानतम लेग स्पिनर अनिल कुंबले बुधवार को अपना 48वां जन्मदिन मना रहे हैं। कुंबले को उन खिलाड़ियों में शुमार किया जाता है, जो कभी हार नहीं मानते। उनका करियर इसे अच्छे से बयां भी करता हैं। जंबो के नाम से मशहूर कुंबले ने टेस्ट में 619 तथा वन-डे में 337 विकेट लिए हैं। टीम इंडिया की ओर से यह टेस्ट और वन-डे में रिकॉर्ड है। देश के सबसे महान और रिकॉर्डधारी गेंदबाज कुंबले के करियर से जुड़ी बड़ी यादें हम आपको बताने जा रहे हैं।

17 अक्टूबर 1970 को जन्में कुंबले का बेहतरीन प्रदर्शन हीरो कप के फाइनल में देखने को मिला था जब उन्होंने कोलकाता के ईडन गार्डन में वेस्टइंडीज के खिलाफ 10 ओवर में महज 12 रन देकर 6 विकेट झटक टीम इंडिया को जीत दिलाई। 21 साल तक यह किसी एक मैच में किसी भारतीय द्वारा सर्वाधिक विकेट लेने का रिकॉर्ड रहा। 2014 में स्टुअर्ट बिन्नी ने बांग्लादेश के खिलाफ 4 रन देकर 6 विकेट लेते हुए यह रिकॉर्ड तोड़ा। 

वेस्टइंडीज दौरे पर एंटीगुआ टेस्ट के दौरान बाउंसर से जबड़ा टूट जाने के बावजूद टीम की जरूरत को देखते हुए अनिल कुंबले ने अगले दिन चेहरे पर पट्टी बांधकर बल्लेबाजी की और फिर 14 ओवर की गेंदबाजी में वेस्टइंडीज के महान बल्लेबाज ब्रायन लारा का विकेट हासिल किया। उनके करियर का यह एक यादगार पल रहा. 

कुंबले अंतिम क्षणों तक हार नहीं मानते थे। उन्होंने पाकिस्तान के खिलाफ 7 फरवरी 1999 को दिल्ली के फिरोजशाह कोटला मैदान में जो कमाल किया था वह काफी लंबे समय तक याद रखा जाएगा। कुंबले ने दिल्ली के दूसरे टेस्ट में पाक की दूसरी पारी में उसके सभी 10 बल्लेबाजों को अपनी फिरकी का शिकार बनाया था। पूरी पारी में कुंबले ने 26.3 ओवर में 9 मेडन के साथ 74 रन देते हुए 10 विकेट लिए। मैच में हालांकि उन्होंने कुल 14 विकेट लिए। 

अनिल कुंबले जब 9 विकेट हासिल कर चुके थे तो टीम इंडिया का हर सदस्य चाह रहा था कि अंतिम विकेट भी कुंबले को ही मिले और इतिहास बन जाए। श्रीनाथ इस दौरान विकेट से बाहर गेंदबाजी कर रहे थे ताकि कुंबले को यह दुर्लभ उपलब्धि हासिल हो सके। वहीं पाक बल्लेबाज वसीम अकरम और वकार यूनिस की अंतिम जोड़ी क्रीज पर जमी हुई थी। इस बीच वकार वसीम से कहते सुने गए कि रन आउट हो जाते हैं तो यह परफेक्ट 10 का रिकॉर्ड नहीं बनेगा।

टीम इंडिया में एक दौर सिर्फ अनिल कुंबले का कहलाता था। 1993 से लेकर 2003 तक करीब दस साल कुंबले भारत के मैच विनर गेंदबाज रहे। जब कभी टीम इंडिया किसी मैच में मुश्किल परिस्थिति में फंसती दिखती तुरंत कुंबले को गेंद दी जाती और टीम इंडिया मैच में वापसी कर लेती। कुंबले को टीम इंडिया के साथी 'जंबो' कहकर पुकारते थे। 1997 के टाइटन कप में तो कुंबले ने शानदार गेंदबाजी कर अकेले दक्षिण अफ्रीका को करारी मात दी थी।