CBSE की चूक 22 लाख छात्रों पर पड़ी भारी, जाने क्या है पेपर सेट करने का तरीक़ा

CBSE की चूक 22 लाख छात्रों पर पड़ी भारी, जाने क्या है पेपर सेट करने का तरीक़ा

सीबीएसई की प्रतिष्ठा को उस समय तगड़ा झटका लगा जब खुलासा हुआ कि पेपर लीक के कारण 10वीं गणित और 12वीं अर्थशास्त्र की परीक्षा दोबारा होगी। इसका सीधा असर 22 लाख छात्रों पर पड़ा है। यहां हम बताएंगे कि सीबीएसई के पेपर सेट करने की प्रक्रिया क्या रहती है और इस बार कहां चूक हुई। सीबीएसई हर साल तीन-चार अलग-अलग रिसॉर्स पर्सन से पर्चा सेट करवाता है। यह रिसॉर्स पर्सन कोई सीबीएसई प्रोफेसर हो सकता है तो किसी स्कूल की फैकल्टी भी हो सकती है। इनकी पहचान उजागर नहीं की जाती है।

पर्चा हाथ से लिखकर नहीं, बल्कि प्रिंट के साथ सीलबंद लिफाफे में रखकर सीबीएसई को भेजे जाते हैं। ये पेपर सीबीएसई के उन अधिकारियों के पास जाते हैं, जो डिफिकल्टी लेवल जांचते हैं। इसके बाद अनुवाद होता है और फाइनल पेपर प्रिंट होते हैं। इसके बाद स्टोरेज में रखे जाते हैं। परीक्षा वाले दिन ये पेपर्स उठाए जाते हैं और परीक्षा केंद्रों पर पहुंचाए जाते हैं, जहां सील तोड़कर बच्चों में बांटे जाते हैं।

...तो इस बार क्या गलत हुआ

आमतौर पर सीबीएसई पेपर्स का चार सेट तैयार करवाता है। ये चार सेट दिल्ली, शेष भारत, विदेशों में स्थित स्कूलों के लिए होते हैं और चौथा सेट अतिरिक्त रहता है। पेपर लीक होने या कोई दूसरी समस्या आने पर यह चौथा सेट इस्तेमाल किया जाता है। इस तरह हर जोन को तीन अलग-अलग सेट मिलते हैं, लेकिन इस बार देश के सभी जोन पर एक ही सेट भेजा गया। यदि ऐसा नहीं किया गया होता तो शायद आज दोबारा परीक्षा की नौबत नहीं आती।