रेखा कैसे बनीं बॉलीवुड की ‘अल्टीमेट दीवा’?

रेखा कैसे बनीं बॉलीवुड की ‘अल्टीमेट दीवा’?

रेखा यानी बीते 4 दशकों से खूबसूरती, अदब, अदा और अदायगी का दूसरा नाम. उम्र के सभी परिमाण ठुकरा चुकीं रेखा आज यानी 10 अक्टूबर को 63 साल की हो रही हैं. लेकिन प्रशंसक जानते हैं कि रेखा हमेशा से ऐसी नहीं थीं.

साल 1966 में एक तेलगु फिल्म रंगुलारत्नम में एक बाल-कलाकार के तौर पर अभिनय की दुनिया में आगाज करने वाली रेखा की पहली हिंदी फिल्म साल 1970 में आई 'सावन भादो' थी.

1972 में रणधीर कपूर के साथ फिल्म 'रामपुर का लक्ष्मण' से रेखा को पहचान मिली. उसके बाद आई कई फिल्मों में रेखा एक सांवली और मोटी हीरोइन ही थीं.

लेकिन साल 1976 कुछ अलग था. ये वो समय था जब रेखा ने अपने लुक्स को बदलने की ठानी. एक इंडस्ट्री जहां आदमी को सिर्फ उसकी शक्ल से तोला जाता था, वहां रेखा का पर्सेप्शन एक मोटी हीरोइन का था जिसे वो गंभीरता से बदलना चाहती थीं.

उनमें अपने अंदर बदलाव लाने की यह तीव्र इच्छा अमिताभ बच्चन से मिलने के बाद पैदा हुई थी. वो ये साबित करना चाहती थीं की वो उनकी हीरोइन बनने के लिए पूरी तरह से फिट हैं. शायद वो साबित करना चाहती थीं की वो अमिताभ के 'लायक' हैं.

उन्होनें अपनी हिंदी, अंग्रेजी, उर्दू के साथ साथ अपने शरीर पर जमे फैट के साथ भी जंग लड़नी शुरु कर दी. रेखा को जानने वाले बताते हैं कि अपने पेट के हिस्से को कम करने के लिए वो पूरे जी जान से पसीना बहा रही थी. वो इतनी मेहनत करने लगी थी की उन्हें जानने वालों को हैरानी हो रही थी.

वहीं अपने चेहरे और अपने मेकअप को भी उन्होनें गंभीरता से लेना शुरु कर दिया था. कभी लाइनर ना लगा सकने वाली एक लड़की अब मेकअप दादा से अपने लुक्स पर बात करने लगी थी. उनके बदलाव की कहानी किसी परी कथा से कम नहीं है.

पहले पहल उन्होंने अजीबो-गरीब डाइट शुरु की. दो महीने तक वो सिर्फ दूध की डाइट पर ज़िंदा रही. इससे वो पतला और 'गोरा' होना चाहती थीं, या कम से कम ऐसी उन्हें सलाह दी गई थी.

1970 में जब योगा का नाम लोगों ने ठीक से सुना नहीं था तब रेखा ने योगा और जीतोड़ वर्जिश से लगभग 30 किलो वजन घटा लिया था.

वो सही मायने में बॉडी ट्रांसफ़ॉर्मेशन की ब्रैंड एंबेसडर बन गई थीं.

एक इंटरव्यू में रेखा बताती हैं, ''मैंने समझा कि मेकअप हमारे बिजनेस की सबसे अहम कड़ी है. इसके ज़रिए आप स्क्रीन पर बेहद खूबसूरत लग सकते हैं. भारत में उन दिनों थिएटर नुमा मेकअप किया जाता था जिसमें आखों के आसपास लंबा काजल, हेवी लिपस्टिक लगा दिए जाते थे. ऐसे में मैं लंदन जाकर खुद मेकअप की टेक्नीक सीख कर आई.''

रेखा ने मीना कुमारी के मेकअप आर्टिस्ट को भी अपने साथ रखा जो मरते दम तक रेखा के लिए काम करते रहे.

रेखा के अंदर आए इन बदलावों की चर्चा पूरे बॉलीवुड में थी लेकिन रेखा ने अपने कई इंटरव्यू में इस बदलाव का श्रेय अमिताभ को दिया. वो बातों बातों में अमिताभ की सलाहों और उनके ज़िंदगी में आने को ही अपने अंदर आए सबसे बड़े बदलाव के रुप में मानती थी.

रेखा ने कहा, 'अमित जी से मैंने समय की पाबंदी, शांति, कायदा, डेडिकेशन, एकाग्रता और प्रोफेशनल होना सीखा है'.

हालांकि अमिताभ बच्चन ने आज तक इस बात पर आधिकारिक कमेंट नहीं किया है, वो हमेशा बिना रेखा का नाम लिए इस बात का जिक्र कर देते हैं. वो कहते हैं कि 'वो' अगर ऐसा कहती हैं तो हम उनके आभारी हैं लेकिन इसमें हमारा कोई योगदान नहीं है.

निर्देशक प्रकाश मेहरा के शब्दों में, 'अमिताभ ने रेखा को एक कल्चर दिया. उसे एहसास हुआ कि अमिताभ के साथ चलने के लिए उसे अमिताभ जैसा होना होगा और अमिताभ की छवि को उन्होनें अपने अंदर समा लिया.'

लेकिन इन सारे बदलावों के बाद भी रेखा के को-स्टार रणधीर कपूर कहते हैं कि उनकी शक्ल से लेकर शरीर तक सब बदल गया लेकिन उनकी आंखें वही और वैसी ही हैं.