कमाल के गायक लकी, बॉलीवुड में रहे थोड़े ‘अनलकी’!

कमाल के गायक लकी, बॉलीवुड में रहे थोड़े ‘अनलकी’!

ये उनके संगीत और गायिकी की कलाकारी है कि जब आप उन्हें सुनते हैं तो आप महसूस करते हैं कि आप सफर पर हैं, भले ही आप एक चार दिवारी के कमरे में अपने मोबाइल या दफ़्तर के कंप्यूटर की स्क्रीन पर इस गाने को देख-सुन रहे हों.

आज 59 साल के हो रहे इस गायक ने जैसे ज़िंदगी में सब करने की ठान ली थी, वो पहले गायक बने, फिर अभिनेता (कांटे, सुर), फिर उन्होनें घोड़े भी पाले, एक तेल के कुएं पर काम भी किया और कार्पेट भी बेचे. उन्होनें लंबे समय तक खेती भी की और फिर वो वापिस गानों में सक्रिय हो गए.

लकी अपने एक इंटरव्यू में बताते हैं,'मुझे लगता है कि जैसे मैं कुछ ढूंढ रहा हूं और यही तलाश मेरे संगीत में है और मेरे जीवन में दिखती है.'

दरअसल अली को बचपन से ही अपने घर में अकेलापन मिला और बॉलीवुड के मशहूर हास्य अभिनेता महमूद के दूसरे बेटे होने के बाद भी वो अपने पिता से बेहद दूर रहे है. 60 और 70 के दशक में महमूद एक बिज़ी सितारे थे और ऐसे में परिवार को समय न दे पाना उनकी मजबूरी थी.

लकी ने बताया था कि जब वो छोटे थे तो अपने पिता को एक एयरपोर्ट पर देख कर पहचान नहीं पाए थे.

लकी, पारिवारिक रिश्तों में थोड़े कमज़ोर ही रहे, उनकी तीन शादियां हुई जिनमें से दो ज्यादा समय चल नहीं सकी ऐसे में लकी को परिवार और रिश्तों से अलग किसी और चीज़ की तलाश थी जिसे उन्होनें संगीत में ढूंढना चाहा.

संगीत ने लकी को वो शोहरत दिलाई जो उनके पिता की शोहरत से कई गुना ज्यादा थी. 1996 में आई उनकी पहली एल्बम 'सुनो' के आते ही संगीत की दुनिया में जाना माना नाम हो गए. उनके गाने 'ओ सनम' को एमटीवी चार्ट में 60 हफ़्तों तक कोई हिला नहीं पाया और इसी गाने के अंदर उनकी पहली पत्नी मीगन जेन भी दिखाई दी थी.

लकी अली की अगली एल्बम थी 'सिफ़र' और इसे लकी ने अपने पिता को डेडिकेट करते हुए कहा था कि जिस तरह उनके पिता ने उन्हें ज़िंदगी भर एक ज़ीरो माना, वो भी खुद को ज़ीरो से ज़्यादा नहीं मानते, क्योंकि ज़ीरो एक अदभुत अंक है.

लकी ने अभिनय और संगीत दोनों ही क्षेत्रों में बुलंदी हासिल की लेकिन फ़ैसला लेने में वो 'अनलकी' रहे और जैसा उनके पिता कहते थे, कि वो अपनी लाइफ़ के साथ कुछ अच्छा नहीं कर रहे हैं, लकी अली ने भी अचानक से संगीत से दूरी बढ़ा ली.

हालांकि इम्तियाज़ अली के कहने पर उन्होनें फ़िल्म 'तमाशा' में एक गीत गाया लेकिन लकी इस बार भी 'अनलकी' रहे, फ़िल्म और गाना दोनों ही नहीं चल पाए. लेकिन इसका ये बिल्कुल मतलब नहीं है कि हम लकी अली के उन गानों को भूल जाएं जो उन्हें ख़ास बनाते हैं. वो अक्सर कहते हैं, कि वो सफ़र में हैं और जो ढूंढ रहे हैं, वो पा ही लेंगे...

दरअसल लकी अली की ड्रग्स की आदत के बाद उनके पिता ने उनकी ज़िंदगी पर एक फ़िल्म बनाई थी 'दुश्मन दुनिया का', इस फ़िल्म में लकी नाम का किरदार अपनी नशे की आदत से इतना मजबूर हो जाता है कि अपने परिवार यहां तक की अपनी मां की भी हत्या कर देता है. इस फ़िल्म में लकी के किरदार में महमूद के तीसरे बेटे मंजूर हीरो बने थे और लकी ने अपने पिता की इस फ़िल्म को नामंज़ूर कर दिया था क्योंकि वो मानते थे कि उनकी पिता की फ़िल्म में उम्मीद की कमी है.

पिता से एक अजीब रिश्ता साझा करने वाले लकी की एल्बम सिफर को रातोंरात हिट मान लिया गया, लोग 'सुनो' के बाद इस गायक को सुनना चाहते थे और लकी को इसका फ़ायदा मिला.