अस्थमा मरीजों के लिए नई ‘हीट थेरेपी’, बिना कोई साइड इफेक्ट्स

अस्थमा मरीजों के लिए नई ‘हीट थेरेपी’, बिना कोई साइड इफेक्ट्स

अस्थमा के 7 से 8 फीसद मरीजों में इसके लक्षण सामने नहीं आते या फिर विकसित नहीं होते, जबकि दवाएं बढ़ती चली जाती हैं. ऐसे मरीजों के लिए एक नई आशा की किरण सामने आई है. एक खास तरह का उपचार (थेरेपी) जिसमें रेडियो फ्रिक्वेंसी हीट वेव (Heat Wave) का इस्तेमाल करके सांस की नली की दीवार को हल्का गर्म किया जाता है. खास बात यह है कि इस प्रक्रिया में मरीज को किसी भी तरह के दुष्प्रभाव (साइड इफेक्ट्स) से नहीं गुजरना पड़ेगा. यह उन मरीजों के लिए भी कारगर साबित होगी जो अस्थमा के साथ स्टेरॉयड (रसायनिक विशेष) की समस्या से भी जूझ रहे हैं.

द टाइम्स ऑफ इंडिया में प्रकाशित खबर के मुताबिक पश्चिमी देशों में इस तकनीक का इस्तेमाल कुछ साल पहले किया गया था और भारत में चेस्ट के कुछ फिजिशियन गंभीर अस्थमा की तकलीफ से गुजर रहे मरीजों पर अब इसका उपयोग कर रहे हैं. ऐसे ही एक मरीज हैं 60 साल के मुकेश गर्ग. पिछले 20 साल से वे लगातार खांसी और सांस नहीं ले पाने की समस्या का सामना कर रहे हैं. बाद उनकी तकलीफ इतनी बढ़ गई कि उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ गया.

सर गंगा राम अस्पताल के सीनियर चेस्ट फिजिशियन डॉ. अरूप बसु ने द टाइम्स ऑफ इंडिया से कहा, 'उसे एंटीबायोटिक्स के हैवी डोज दिए गए. हालांकि इसकी वजह से साइट इफेक्ट्स की भी खतरा हो सकता है. इसलिए हमने उनका इलाज ब्रॉनिकल थेरेमोप्लास्टी (BT) के जरिए करना शुरू किया.'  इसके साथ ही उन्होंने कहा कि ब्रॉनिकल थेरेमोप्लास्टी के दौरान एक खास नली का इस्तेमाल हुआ, जिसे तीन अलग-अलग सप्ताह में तीन चरणों (सीटिंग्स) में सामान्य ब्रोन्कोस्कोपी के दौरान डाला गया. कुछ मरीजों को सिर्फ दो चरण में ही राहत मिल गई.