जाने कहाँ पांडवों ने किया था प्रायश्‍चित !

जाने कहाँ पांडवों ने किया था प्रायश्‍चित !

लोहार्गल राजस्थान के शेखावाटी इलाके में झुन्झुनू जिले से 70 किलोमीटर दूर आड़ावल पर्वत की घाटी में बसे उदयपुरवाटी कस्बे के पास स्‍थित है। लोहार्गल का अर्थ होता है वह स्थान जहां लोहा भी गल जाए। इस मंदिर का नाम इसी तथ्‍य पर आधारित है और पुराणों में भी इस स्थान का जिक्र मिलता है। नवलगढ़ तहसील में स्थित इस तीर्थ लोहार्गल जी को स्थानीय अपभ्रंश भाषा में लुहागरजी भी कहा जाता है। इस मंदिर के साथ पाण्‍डवों के प्रायश्‍चित की कथा के साथ परशुराम से संबंधित एक कथा भी प्रचलित है।  

पांडवों ने यहां किया था प्रायश्‍चित

इस स्‍थान के बारे में सबसे प्रचलित कथा है कि महाभारत युद्ध समाप्ति के बाद पाण्डव जब आपने भाई बंधुओं और अन्य स्वजनों की हत्या करने के पाप से अत्यंत दुःखी थे, तब भगवान श्रीकृष्ण की सलाह पर वे पाप मुक्ति के लिए विभिन्न तीर्थ स्थलों के दर्शन करने के लिए गए। श्रीकृष्ण ने उन्हें बताया था कि जिस तीर्थ में तुम्हारे हथियार पानी में गल जाए वहीं तुम्हारा पाप मुक्ति का मनोरथ पूर्ण होगा। घूमते-घूमते पाण्डव लोहार्गल आ पहुंचे तथा जैसे ही उन्होंने यहां के सूर्यकुण्ड में स्नान किया, उनके सारे हथियार गल गये। तब उन्होंने इस स्थान की महिमा को समझ इसे तीर्थ राज की उपाधि प्रदान की। लोहार्गल से जुड़ी परशुराम जी की कथा इस प्रकार है। माना जाता है कि इस जगह पर उन्‍होंने भी पश्चाताप के लिए यज्ञ किया तथा पाप मुक्ति पाई थी। उन्‍होंने ये प्रायश्‍चित क्रोध में क्षत्रियों का संहार करने के बाद शान्त होने पर अपनी गलती का अहसास होने पर किया था।