माता पाउड़ी पर अटूट आस्था का कारण क्या है, जाने....

माता पाउड़ी पर अटूट आस्था का कारण क्या है, जाने....

स्थानीय निवासियों की माता पाउड़ी पर अटूट आस्था रही है। मान्यता है कि पोड़ाहाट राजघराने की कुल देवी पाउड़ी मां अपने भक्तों पर आशीष बरसाती हैं। वर्ष 1260 में ¨सहभूम के महाराजा व भुईंया समुदाय के राजघराने की स्थापना के साथ ही मां पाउड़ी की पूजा-अर्चना का सिलसिला प्रारंभ हुआ। इसी से मां पाउड़ी राजघराने की कुलदेवी मानी जाती हैं। ¨सहभूम के राजा मां पाउड़ी की मूर्ति की स्थापना शक्ति की अधिष्ठात्री देवी के रूप में की थी। तत्पश्चात राजा अच्युता ¨सह ने पोड़ाहाट में मां पाउड़ी की प्रतिमा स्थापित की। पोड़ाहाट में सबसे पहले राज परिवार द्वारा बांसकाटा डैम के समीप मां पाउड़ी की पूजा की जाती थी। कालातंर में पोड़ाहाट राजघराने की राजधानी चक्रधरपुर में स्थानांतरित कर दी गई। इससे पूर्व वर्ष 1802 में सरायकेला राजघराने के कुंवर विक्रम ¨सह एक रात पोड़ाहाट से राजघराने की ईष्ट देवी की प्रतिमा चुराकर भाग निकले। इस दौरान चक्रधरपुर के बालिया घाट के समीप पाउड़ी मां का आसन गिर पड़ा। तत्कालीन राजा ने माता के इस आसन को अपनी राजबाड़ी के समीप स्थापित कराया। 

पुराना बस्ती से सटी संजय नदी के किनारे स्थित पाउड़ी स्थल में सन् 1971 में माता की प्रतिमा स्थापित की गई। इसके पूर्व यह झाड़ियों व पेड़ों से घिरा वीरान क्षेत्र था। 1969 में समाजसेवी सह पाउड़ी माता के अनन्य भक्त मन्मथ कुमार ¨सह को माता ने स्वप्न में मंदिर निर्माण कराने का निर्देश दिया। बकौल ¨सह- उन्हें दैवीय आदेश को पूरा करने में पूरे दो साल लग गए। दिवंगत सांसद रूद्र प्रताप षाड़ंगी के साथ पुराना बस्ती के निवासियों के सहयोग से 1971 में मां पाउड़ी मंदिर की स्थापना की। बिना प्रतिमा के शिला को दो सालों तक माता के तौर पर पूजा जाता रहा। 1973 में कंसरा के घने जंगल के कुईतुका खदान से लाए गए पत्थर से मां पाउड़ी की प्रतिमा का निर्माण कराया गया। शिल्पकार कन्हैया साहू ने प्रतिमा को स्वरूप दिया। मां पाउड़ी केरा व कंसरा माता की बहन है। 1971 से चक्रधरपुर पुराना बस्ती के समीप संजय नदी के किनारे मां पाउड़ी पूजनोत्सव के अवसर पर चैत मेले का आयोजन जारी है। कालांतर में आयोजन में कई खामियों से खिन्न होकर पाउड़ी मंदिर के संस्थापक सदस्य मन्मथ कुमार ¨सह ने चैत मेले से तौबा कर ली। ¨सह ने माता पर आस्था रखते हुए 2005 में पुराना बस्ती में ही पोड़ाहाट राजबाड़ी के समीप रखे पाउड़ी माता के आसन के लिए मंदिर का निर्माण कराया। चैत पूजा में मां पाउड़ी के दर्शनार्थी यहां भी आकर मत्था टेकते हैं।