ममता ने किया गृह मंत्री से सवाल, ‘क्या पश्चिम बंगाल में भी तैयार होगा NRC’

ममता ने किया गृह मंत्री से सवाल, ‘क्या पश्चिम बंगाल में भी तैयार होगा NRC’

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जीने आज केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह से यह स्पष्ट करने को कहा कि क्या केंद्र सरकार असम की तर्ज पर पश्चिम बंगाल में भी नेशनल सिटिजन रजिस्टर (एनआरसी) तैयार करने की कवायद चाह रही है. ममता ने असम में एनआरसी तैयार करने की कवायद के लिए भाजपा की अगुवाई वाली केंद्र सरकार पर राजनीतिक फायदे के लिए लोगों को बांटने का आरोप लगाया है. दिल्ली में ममता ने मंगलवार को राजनाथ से उनके आवास पर मुलाकात की और दावा किया कि उन्होंने उन 40 लाख लोगों के नाम उन्हें सौंपे हैं जिनके नाम सोमवार को एनआरसी के अंतिम मसौदे में शामिल नहीं किए गए. 

 

बंगाल में बीजेपी का दावा, बनेगा NRC- बनर्जी  
ममता ने राजनाथ से मुलाकात के बाद कहा, ‘‘मैं यहां एनआरसी पर बात करने के लिए आई. उन 40 लाख लोगों के नाम सौंपे जिनके नाम छूट गए हैं. मैंने उन्हें बताया कि उनका नेतृत्व दावा कर रहा है कि अगला एनआरसी बंगाल में बनेगा. उन्हें किसने अधिकार दिया है.’’ एनआरसी लाने के फैसले को ‘‘आपदा’’ करार देते हुए ममता ने केंद्रीय गृह मंत्री से अपील की कि वह असम के लोगों की समस्याओं के समाधान के लिए संशोधन करें. बाद में गृह मंत्री ने बयान जारी कर कहा कि एनआरसी का मसौदा असम समझौते के प्रावधानों के मुताबिक और सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में तैयार किया गया है.

सभी को मिलेगा पक्ष रखने का मौका- गृह मंत्री
राजनाथ ने बयान में कहा, ‘‘मैंने उनसे (ममता से) कहा कि एनआरसी का मसौदा असम समझौते के प्रावधानों के मुताबिक और केंद्र, असम की राज्य सरकार एवं ऑल असम स्टूडेंट्स यूनियन के बीच एनआरसी 1951 को अद्यतन करने के लिए पांच फरवरी 2005 को हुई त्रिपक्षीय बैठक में लिए गए फैसलों के मुताबिक प्रकाशित किया गया है.’’ राजनाथ ने यह भी कहा कि उन्होंने ममता को बताया था कि एनआरसी को अद्यतन करने की कवायद ‘‘पूरी तरह निष्पक्ष, पारदर्शी, गैर-भेदभावकारी और कानूनी तरीके’’ से अंजाम दी जा रही है. उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया में किसी को परेशान नहीं किया जाएगा और प्रक्रिया के हर चरण में सभी लोगों को अपना पक्ष रखने के पर्याप्त अवसर दिए जाएंगे. 

सत्ताधारी भाजपा ने ममता की आलोचना को खारिज करते हुए कहा कि वह अवैध प्रवासियों को वोट बैंक की तरह देखती हैं जबकि भाजपा देश की सुरक्षा एवं अपने नागरिकों के अधिकारों के लिए ज्यादा चिंतित है.