J&K: रमजान के दौरान आतंकियों के खिलाफ नहीं चलेगा ऑपरेशन, मोदी सरकार ने मानी महबूबा की बात

J&K: रमजान के दौरान आतंकियों के खिलाफ नहीं चलेगा ऑपरेशन, मोदी सरकार ने मानी महबूबा की बात

जम्मू-कश्मीर में रमजान के दौरान सेना और दूसरे सुरक्षा बल आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं करेंगे। यह रोक सशर्त है। यानी आतंकवादी हमले और पत्थरबाजी की सूरत में सुरक्षा बलों को जवाबी कार्रवाई करने की पूरी छूट होगी। केंद्र ने लंबे सलाह-मशविरे के बाद मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती का कार्रवाई स्थगित करने का अनुरोध मान लिया। इस कदम को कश्मीर घाटी में शांति का माहौल बनाने के प्रयास के तौर पर देखा जा रहा है।केंद्रीय गृह मंत्रालय के प्रवक्ता के मुताबिक, गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने खुद सीएम महबूबा को इस फैसले की जानकारी दी। यह फैसला पीएम नरेंद्र मोदी के जम्मू-कश्मीर दौरे से दो दिन पहले किया गया है। सीएम महबूबा मुफ्ती और नेशनल कांफ्रेंस के नेता उमर अब्दुल्ला ने केंद्र के इस फैसले का स्वागत किया है। वहीं आतंकी संगठन लश्कर-ए-ताइबा ने कार्रवाई रोकने के फैसले को खारिज कर दिया है।

इससे पहले, राजनाथ ने ट्वीट कर कहा, ‘इस फैसले से शांति और सौहार्द में यकीन रखने वाले मुसलमानों को इस पवित्र महीने में उत्सव का माहौल मिलेगा। केंद्र ने सुरक्षा बलों को रमजान के महीने में कोई भी ऑपरेशन नहीं करने का आदेश दिया है। लेकिन सुरक्षा बलों को कश्मीर के लोगों की सुरक्षा करने और खुद पर हुए हमले का जवाब देने के लिए पूरी स्वतंत्रता रहेगी।’ गृहमंत्रालय ने उम्मीद जताई है कि सभी तरह से लोग सुरक्षा की इस व्यवस्था में सहयोग करेंगे। ताकि मुसलिम भाई बहन बिना किसी व्यवधान के रमजान का पाक महीना मना सकें।

आतंकी प्रोफेसर की मौत के बाद से हो रहा था विचार 

गृह मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक, कश्मीर विश्वविद्यालय के प्रोफेसर के आतंकवाद का दामन थामने की घटना के बाद सुरक्षा और सरकारी हलकों में केंद्र की आक्रामक कश्मीर नीति पर सवाल उठने लगे थे। यह आतंकी प्रोफेसर सुरक्षा बल की कार्रवाई में मारा गया था। इस घटना के एक दिन बाद ही पत्थरबाजों के हाथों एक सैलानी की मौत ने राज्य सरकार को भी चिंता में डाल दिया। इन घटनाओं के बाद से ही कश्मीर की आक्रामक नीति पर पुनर्विचार किया जा रहा था। सूत्रों ने बताया कि सीजफायर से दौरान कश्मीरी युवाओं से संवाद खोलने और उन्हें मुख्यधारा में शामिल करने की व्यापक कोशिशें की जाएगी।
 

अटल के नीको की तर्ज पर हुआ फैसला 

केंद्र का यह कदम ठीक उसी तरह का है, जैसा साल 2000 में अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार के दौरान उठाया गया था। तब एनडीए सरकार ने आतंकवाद रोधी ऑपरेशन की शुरुआत नहीं (नीको) का एलान किया था। हालांकि नीको को 5 महीने बाद ही हटा लिया गया, क्योंकि इस अवधि में हिंसा की घटनाएं बहुत बढ़ गई थीं। इस दौरान श्रीनगर एयरपोर्ट पर लश्कर-ए-ताइबा के आतंकियों ने हमला किया था। इसमें दो सुरक्षा कर्मियों और दो आम लोगों की जान चली गई थी। जवाबी कार्रवाई सभी छह आतंकी मारे गए थे।


 

अमरनाथ यात्रा को लेकर स्थिति साफ नहीं 

गृहमंत्रालय की ओर से यह साफ नहीं किया गया है कि सैन्य अभियान अमरनाथ यात्रा के दौरान भी रुके रहेंगे या नहीं। अमरनाथ यात्रा 28 जून से 26 अगस्त तक चलेगी। महबूबा मुफ्ती ने रमजान से अमरनाथ यात्रा जारी रहने तक कार्रवाई रोकने का अनुरोध किया था।