21 साल का मनन चला गया पर 4 लोगों को दे गया जिंदगी

21 साल का मनन चला गया पर 4 लोगों को दे गया जिंदगी

21 साल का नौजवान मनन जैन दुनिया को कम उम्र में अलविदा कह गया, लेकिन जाते-जाते चार लोगों को नई जिंदगी दे गया.

वैसै तो कहा जाता है कि जिंदगी और मौत भगवान के हाथ में है, लेकिन इस बार भगवान ने एक जिंदगी लेकर मनन को चार लोगों की नई जिंदगी का जरिया बना दिया.

मनन दुनिया से हमेशा के लिए चला गया, लेकिन उसके गुर्दे, फेफड़े और दिल अलग-अलग लोगों के जिस्म में हमेशा के लिए समा गए.

जयपुर के मालवीय नगर के रहने वाले मनन जैन का 9 अक्टूबर को बाइक पर एक्सीडेंट हो गया था.  उसको राजधानी के एक हॉस्पिटल में ले जा गया, जहां डॉक्टर ने मनन को बचाने में पूरी जी जान लगा दी, लेकिन भगवान को कुछ और ही मंजूर था.21 साल का नौजवान मनन जैन दुनिया को कम उम्र में अलविदा कह गया, लेकिन जाते-जाते चार लोगों को नई जिंदगी दे गया.

वैसै तो कहा जाता है कि जिंदगी और मौत भगवान के हाथ में है, लेकिन इस बार भगवान ने एक जिंदगी लेकर मनन को चार लोगों की नई जिंदगी का जरिया बना दिया.

मनन दुनिया से हमेशा के लिए चला गया, लेकिन उसके गुर्दे, फेफड़े और दिल अलग-अलग लोगों के जिस्म में हमेशा के लिए समा गए.

जयपुर के मालवीय नगर के रहने वाले मनन जैन का 9 अक्टूबर को बाइक पर एक्सीडेंट हो गया था.  उसको राजधानी के एक हॉस्पिटल में ले जा गया, जहां डॉक्टर ने मनन को बचाने में पूरी जी जान लगा दी, लेकिन भगवान को कुछ और ही मंजूर था.

ईएचसीसी के डॉक्टर्स को मनन के ब्रेन डेड होने की जानकारी लगते ही उन्होंने मनन के माता पिता को मेडिकल स्थिति से अवगत करवाया और अंगदान करने के लिए कहा.

इसके बाद मनन के माता-पिता पूरी रात उधेड़बुन में बन रहे, लेकिन सुबह होने तक उन्होंने आखिरकार चार लोगों की जिंदगी बचाने का फैसला ले लिया. उसके बाद मनन के दिल को हवाई मार्ग के जरिए दिल्ली ले जाया गया, लीवर को निम्स ले जाया गया और उसके दोनों गुर्दे दो अलग-अलग लोगों को जयपुर के ही ईएससीसी हॉस्पिटल में दान किए गए.

कोई भी पिता अपने जीते जी नहीं चाहता कि उसके बेटे का जनाजा उसके कंधे पर निकले, लेकिन राकेश जैन वो बहादुर पिता हैं जिन्होंने पूरी दुनिया की हिम्मत बटोर कर ना केवल अपने बेटे को कंधा दिया बल्कि चार लोगों में जिंदगी की नई उम्मीद जगाई.