एशियन गेम्स : रिक्शा चालक की बेटी ने देश को दिलाया सोना

एशियन गेम्स : रिक्शा चालक की बेटी ने देश को दिलाया सोना

खेल दिवस पर दो स्वर्ण की सौगात एशियन गेम्स में बुधवार का दिन भारत के लिए ऐतिहासिक रहा। खेल दिवस के दिन पहला स्वर्ण अरपिंदर ने पुरुषों की ट्रिपल जंप में, जबकि दूसरा स्वर्ण पदक हेप्टाथलॉन में स्वप्ना बर्मन ने जीता। स्वप्ना बर्मन ने महिलाओं की हेप्टाथलॉन का स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रच दिया। वह हेप्टाथलॉन में भारत के लिए स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला एथलीट बन गईं हैं। दांत दर्द के बीच खेलने उतरीं स्वप्ना ने सात स्पर्धा के बाद 6026 अंकों के साथ स्वर्ण पदक पर कब्जा जमाया। इस सुनहरी जीत की कड़ी में उन्होंने ऊंची कूद (1003 अंक) और भाला फेंक (872 अंक) स्पर्धा में पहले स्थान पर रहीं जबकि गोला फेंक (707 अंक) और लंबी कूद (865 अंक) में दूसरे स्थान पर रहीं।

एशियन गेम्स-2018 के 11वें दिन स्वप्ना ने हेप्टाथलॉन में गोल्ड जीतकर पूरे देश का नाम रोशन किया है। इस जीत के साथ ही स्वप्ना के घर व पूरे इलाके के लोगों में खुशी का माहौल देखा गया। एक दूसरे को मिठाई खिलाते हुए पटाखे फोड़े गए।

जलपाईगुड़ी सदर ब्लॉक के कलियागंज घोषापाड़ा निवासी रिक्शा चालक की बेटी स्वप्ना बर्मन एशियन गेम्स में सोना जीतकर देश का मान बढ़ाया है। रिक्शा चालक पिता पंचानन बर्मन स्ट्रोक के चलते 2013 से बिस्तर पर पड़े हैं। मां बसना बर्मन बागान श्रमिक थी। एथलेटिक्स में स्वप्ना की सबसे बड़ी समस्या पैर में छह अंगुली होना है। स्कूल शिक्षक विश्वजीत कर ने सपना को खेल के मैदान तक पहुंचाया। बिना छत के घर व दो वक्त की रोटी के लिए परेशान स्वप्ना को पैर में छह अंगुली के चलते खेल के जूते नहीं मिल रहे थे। जूता पहनने पर दर्द होता था। घर चलाने की जिम्मेदारी भी स्वप्ना व बड़े भाई असित बर्मन की ही है।

एशियन गेम्स शुरू होने से ठीक पहले स्वप्ना के दांत में चोट लगी थी। बावजूद सपना खेल में अपने प्रदर्शन पर केंद्रीत रहकर सोना जीतकर दिखाई है। 19 दिसंबर 1996 में जन्मी स्वप्ना नौ वर्ष की आयु से खेल रही है। राज्य के हाई जंप का रिकार्ड भी सपना के पास है। 2014 एशियन चैंपियनशिप में स्वप्ना को 5वां स्थान मिला था। 2017 में लंदन में व‌र्ल्ड चैंपियनशिप में 21वें स्थान पर रही थी। 2017 में भूवनेश्वर में एशियन ट्रैक एंड फिल्ड मीट में गोल्ड मेडल पाने में सफल रही थी।