भारत की टेलिकॉम कंपनियों के लिए 5G को लेकर क्या है सबसे बड़ी चुनौती

भारत की टेलिकॉम कंपनियों के लिए 5G को लेकर क्या है सबसे बड़ी चुनौती

भारत में 5G के लिए प्रमुख चुनौती?

भारत की टेलिकॉम कंपनियों के लिए 5G को लेकर सबसे बड़ी चुनौती स्पेक्ट्रम के रिजर्व प्राइज को लेकर है। यह रकम काफी ज्यादा है। 5G के स्पेक्ट्रम की नीलामी दिसंबर से शुरू करने की तैयारी है और इसके लिए सरकार ने 5 लाख करोड़ रुपये का रिजर्व प्राइज आरक्षित किया है। शुरुआती तौर पर 5G के लिए 3,500 मेगाहर्ट्ज बैंड में स्पेक्ट्रम की नीलामी की जानी है। अगर कोई पूरे देश में इस बैंड के लिए स्पेक्ट्रम चाहता है तो उसे 1 लाख 47,600 करोड़ रुपये खर्च करने होंगे। ऐसे में कहा जा सकता है कि पहले से ही आर्थिक संकट से जूझ रही टेलीकॉम कंपनियों को 5जी की खरीद काफी महंगी पड़ेगी।

5G के लिए कितना तैयार है भारत?

घोष ने बताया बेशक भारत में 5G के लिए तैयारियां तेज हैं, लेकिन अगर इन्फ्रास्ट्रक्चर के लिहाज से देखें तो अभी काफी कुछ किया जाना बाकी है। देश में इसके लिए कंपीटेबल फाइबर केबल बिछानी होंगी, 5जी को सपोर्ट करने वाली डिवाइस लॉन्च करनी होंगी। साथ ही मोबाइल एप्लीकेशन्स को 5जी के लिहाज से सपोर्टिव बनाना होगा।

कौन सी टेलीकॉम कंपनी 5G को खरीदने में फिलहाल सक्षम?

बीते दिन तक देश की नंबर एक टेलीकॉम कंपनी भारती एयरटेल को पिछले 15 सालों में पहली बार घाटे का सामना करना पड़ा है। वहीं एयरसेल की स्थिति किसी के छिपी नहीं है। वोडा और आइडिया का हाल ही में मर्जर हुआ है लेकिन उन पर भी बैंकों का बड़ा कर्ज है। इस बीच सिर्फ जियो की एकलौती कंपनी है जो कि 5G के भारी भरकम और महंगे स्पेक्ट्रम को खरीदने की स्थिति में दिखाई दे रही है।