महिलाओं में कम से हो सकता है बहरेपन का खतरा, करना होगा ये काम

महिलाओं में कम से हो सकता है बहरेपन का खतरा, करना होगा ये काम

संतुलित आहार लेने से महिलाओं में बहरेपन का खतरा कम हो सकता है. अमेरिका में बर्मिंघम एंड वुमेंस हास्पि टल के शोधकर्ताओं ने यह बात कही है. उन्होंने तीन अलग - अलग तरह के आहारों और बहरे होने के खतरे के बीच के रिश्ते का अध्ययन किया. उन्होंने 22 वर्षों तक तीन अलग आहार द ऑल्टरनेट मेडिटेरेनियन डाइट , डाइटर अप्रोचेज टू स्टॉप हाइपरटेंशन और अल्टर्नेटिव हेल्दी इटिंग इंडेक्स -2010 लेने वाली 70,966 महिलाओं का अध्ययन किया. पहले आहार में जैतून का तेल , अनाज , फली , सब्जियां , फल , मछली और शराब की हल्की मात्रा शामिल है.

दूसरी तरह के आहार में अधिक मात्रा में फल और सब्जियों तथा कम फैट वाले डेयरी उत्पाद और कम मात्रा में सोडियम शामिल है. तीसरे आहार में पहले दो आहारों की सामग्री शामिल हैं. जर्नल ऑफ न्यूट्रिशियन में प्रकाशित इस अध्ययन में यह पाया गया है कि संतुलित आहार लेने से महिलाओं के बहरे होने का खतरा कम हो जाता है. बर्मिंघम एंड वुमेंस हास्पिटल से शैरन करहन ने कहा , ‘‘ अच्छा आहार लेने से सेहत पर अच्छा असर पड़ता है और इससे बहरेपन का खतरा कम करने में भी मदद मिल सकती है. ’’ 

बहरेपन से बचाने के लिए बच्चों में टीकाकरण है बेहद जरूरी
दुनिया की लगभग 5 प्रतिशत आबादी को ठीक से सुनाई नहीं देता. इनमें 3.2 करोड़ बच्चे हैं. भारतीय आबादी का लगभग 6.3 प्रतिशत में यह समस्या मौजूद है और इस संख्या में लगभग 50 लाख बच्चे शामिल हैं. इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) के अनुसार, इनमें से अधिकांश मामलों को समय पर उचित टीकाकरण कराके, ध्वनि प्रदूषण को नियंत्रित करके और कुछ दवाओं के इस्तेमाल से रोका जा सकता है.

बहरापन मुख्यत: दो प्रकार का होता है. जन्म के दौरान ध्वनि प्रदूषण और अन्य समस्याओं के कारण नस संबंधी बहरापन हो जाता है. व्यवहारगत बहरापन सामाजिक व आर्थिक कारणों से होता है, जैसे कि स्वच्छता और उपचार की कमी. इससे काम में संक्रमण बढ़ता जाता है और बहरापन भी हो सकता है.

बहरापन रोकने के लिए अपनाएं ये उपाय:
कान में किसी भी तरह का झटका या चोट न लगने दें. इससे कान के ड्रम को गंभीर नुकसान हो सकता है, जिससे सुनने की क्षमता घट जाती है.

यह सुनिश्चित करें कि स्नान के दौरान शिशु के कानों में पानी न जाए.

थोड़ा सा भी अंदेशा होने पर शिशु को चिकित्सक को दिखाना चाहिए. 

शिशु के कानों में कभी नुकीली वस्तु न डालें.

बच्चों को तेज आवाज के संगीत या अन्य ध्वनियों से दूर रखें, क्योंकि इससे उनकी सुनने की क्षमता प्रभावित हो सकती है. 

यह सुनिश्चित करें कि बच्चों को खसरा, रूबेला और मेनिन्जाइटिस जैसे संक्रमणों से प्रतिरक्षित करने के लिए टीका लगवा जाए.