अफगानिस्तान पर ‘समावेशी’ शांति प्रक्रिया पर भारत के रुख में कोई फर्क नहीं: विदेश मंत्रालय

अफगानिस्तान पर ‘समावेशी’ शांति प्रक्रिया पर भारत के रुख में कोई फर्क नहीं: विदेश मंत्रालय

विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार को कहा कि अफगानिस्तान पर भारत के रुख में कोई परिवर्तन नहीं आया है और वह वहां शांति स्थापना के लिए किसी भी 'समावेशी' प्रक्रिया की हिमायत करता है.

 

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने यह भी कहा कि भारत ने अमेरिका के समक्ष 'बहुत साफ' कर दिया है कि अफगानिस्तान में शांति और सुलह-सफाई अफगान-नीत, अफगान-नियंत्रित और अफगान-स्वामित्व वाली होनी चाहिए.

विदेश मंत्रालय की यह टिप्पणी भारतीय सेना के प्रमुख जनरल बिपिन रावत के गुरुवार के इस बयान के बाद आई है जिसमें उन्होंने कहा था कि जब कई देश तालिबान से संवाद कर रहे हैं, भारत उससे अलग नहीं रह सकता.

कुमार ने कहा कि जब विदेश मंत्री सुषमा स्वराज और विदेश सचिव विजय गोखले ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के विशेष अफगानिस्तान दूत जलमय खलीलजाद से मुलाकात की थी तो उन्हें यह बात बता दी गई थी.

खलीलजाद की यात्रा से ले कर सेना प्रमुख की टिप्पणी तक अफगानिस्तान पर ढेर सारे सवालों का जवाब देते हुए विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा, 'अनिवार्यत:, दोनों पक्ष, हम अफगानिस्तान में शांति और सुलह-सफाई पर परिप्रेक्ष्य साझा करते हैं. श्री खलीलजाद ने विदेश मंत्री और विदेश सचिव से अपने पहलु को साझा किया कि कैसे अमेरिका देश में शांति और सुलह-सफाई हासिल करना चाहता है.' 

कुमार से जब पूछा गया कि क्या इन बैठकों में अफगानिस्तान में पाकिस्तान की भूमिका पर कोई चर्चा की गई तो उन्होंने कहा कि पाकिस्तान जो अस्थिरकारी भूमिका निभाता है उसके बारे में बार-बार बताया जाता रहा है.

उन्होंने कहा, यह सेना प्रमुख की टिप्पणियों से जुड़ा है. अफगानिस्तान पर हमारा रुख बहुत साफ और बहुत सुसंगत रहा है. हमने अतीत में कहा है और हम यह कहना जारी रखे हैं कि भारत अफगानिस्तान में शांति और सुलह-सफाई प्रयासों की हिमायत करता है.' उन्होंने कहा, 'हम ऐसी प्रक्रिया का समर्थन करते हें जो इस लक्ष्य को पूरा करने की दिशा में समावेशी हो और इस रुख में कोई फर्क नहीं आया है.'