अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा की फेयरवेल स्पीच; ट्रंप को इशारों में दी नसीहत, लगे ‘चार साल और’ के नारे

अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा की फेयरवेल स्पीच; ट्रंप को इशारों में दी नसीहत, लगे ‘चार साल और’ के नारे

शिकागो: लगातार दो कार्यकालों यानि 8 साल तक अमेरिका के राष्ट्रपति की कुर्सी पर बैठने वाले बराक ओबामा ने आज अपना विदाई भाषण दिया. उन्होंने ये कहते हुए अपनी बात शुरू की कि हर दिन अमेरिका के लोगों ने उन्हें एक बेहतर राष्ट्रपति और एक बेहतर इंसान बनाया है. वे आगे कहते हैं कि बदलाव तभी होता है जब आम आदमी उसमें शामिल हो और इसकी मांग के लिए आगे आता है.

भाषण के बीच में जब शिकागो की जनता उनसे आने वाले अगले चार सालों तक राष्ट्रपति बने रहे की भावनात्मक अपील की तब उन्होंने भावनाओं का सम्मान करते हुए कहा कि ऐसा संभव नहीं है. वे आगे कहते हैं कि अमेरिका के पूवर्जों ने देश को अनमोल तोहफे दिए जिसके सहारे देश का हर इंसान मेहनत और पसीना बहाकर अपने सपनों को साकार कर सकता है. अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि लोकतंत्र को एकजुटता के सहारे की ज़रूरत होती है और लोकतांत्रिक व्यवस्था में लोग एक साथ उत्थान और पतन का सामना करते हैं.

‘मजबूत हुआ अमेरिका’

ओबामा ने कहा कि आने वाले 10 दिनों में अमेरिका लोकतंत्र की कसौटी पर खरा उतरते हुए एक चुने हुए राष्ट्रपति के हाथ से दूसरे चुने गए राष्ट्रपति के हाथ सत्ता सौंप देगा. वे आगे कहते हैं कि जब उनकी सरकार ने जिम्मेदारियां संभाली थी तब से अब का अमेरिका बेहतर और मजबूत हुआ है. एक और बड़ी बात बताते हुए उन्होंने कहा कि नवनिर्वाचित अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को बिना किसी परेशनी के सत्ता हस्तांतरण का वादा किया है.

ओबामा ने अपनी बात आगे बढ़ाते हुए कहा कि वे अभी भी नस्लभेद को अमेरिकी समाज के लिए एक प्रबल और फूट डालने वाली वजह मानते हैं. उनका ये भी मानना है कि उन्होंने जितना और जैसा जीवन अमेरिका में बिताया है उसके आधार पर उन्हें लगता है कि नस्लवाद की स्थिति 10, 20 या 30 साल पहले की तुलना में बेहतर है. साथ ही उन्होंने देश के लोगों को एक-दूसरे की बातों को अहमियत देने की भी नसीहत दी. ओबामा ने अप्रवासियों के बच्चों को लेकर अमेरिका को और जिम्मेदार बनने की नसीहत दी है. उनका कहना है कि अमेरिका में काम कर रहे लोगों में अप्रवासियों की अहम भागीदारी है.

उन्होंने आगे कहा कि बीते आठ सालों में किसी आंतकी संगठन ने अमेरिकी सरजमीं पर हमला करने में सफलता नहीं पाई है. वे कहते हैं कि बावजूद इसके बॉस्टन और ऑरलैंडो में हुए हमले इस ओर इशारा करते हैं कि कट्टरता कितनी खतरनाक हो सकती है.

‘अमेरिका को नुकसान पहुंचाने वाले सुरक्षित नहीं पाएंगे’

अपने कार्यकाल में मारे गए दुनिया के सबसे बड़े आतंकी ओसामा बिन लादेन का नाम लेते हुए उन्होंने देश को बताया कि बीते आठ सालों में अमेरिका ने अनगिनत आतंकियों को ठिकाने लगाया है. ओबामा ने कहा कि ISIL की भी बर्बाद हो जाएगा और ऐसा कोई सुरक्षित नहीं रह सकता जो अमेरिका को नुकसान पहुंचाने की बात करे.

‘मुसलमानों से भेदभाव के खिलाफ हूं’

वहीं उन्होंने ट्रंप से अलग लाइन लेते हुए कहा कि वे अमेरिका मुसलमानों संग होने वाले भेदभाव के खिलाफ हैं. भावनात्मक अपील करते हुए उन्होंने देशवासियों से अपने बदलाव लाने की क्षमता में भरोसा रखने को कहा. अपने पहले राष्ट्रपति चुनाव के कैंपेन में इस्तेमाल की गई काफी सफल रही कैंपेन लाइन Yes We can के साथ वे अपनी स्पीच समापन की ओर ले गए.

वहीं पत्नी मिशेल ओबामा की तारीफ करते हुए उन्होंने कहा कि पिछले 25 सालों में वे सिर्फ उनकी पत्नी और बच्चों की मां ही नहीं रहीं बल्कि उनकी सबसे अच्छी दोस्त भी रही हैं. अमेरिकी युवाओं का मनोबल बढ़ाने के लिए भी ओबामा ने मिशेल का शुक्रिया अदा किया.