मोदी-ट्रंप की पहली मुलाकात इसी महीने, क्या दिखेगी ओबामा जैसी दोस्ती?

मोदी-ट्रंप की पहली मुलाकात इसी महीने, क्या दिखेगी ओबामा जैसी दोस्ती?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ट्रंप युग में पहले अमेरिकी दौरे पर 25 जून को वाशिंगटन पहुंचेंगे. इसके बाद 26 जून को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से उनकी मुलाकात होगी. अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप से मोदी की यह पहली मुलाकात होगी. इससे पहले दोनों नेताओं ने बस फोन पर ही बात की है. ट्रंप की जीत पर बधाई देने वाले पहले पांच नेताओं में मोदी भी थे. उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनावों में जीत के बाद भी ट्रंप ने मोदी को कॉल कर बधाई दी थी.

ट्रंप के साथ होनेवाली पहली मुलाकात इस सवाल को जन्म दे रही है कि क्या यह मुलाकात पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा के साथ मोदी की हुई मुलाकातों जितनी शानदार होगी. ओबामा और मोदी के बीच की दोस्ती ने काफी चर्चाएं बटोरी थी. 2014 में प्रधानमंत्री बनने के बाद अपने पहले अमेरिकी दौरे से पहले दोनों ने 'वाशिंगटन पोस्ट' में एक कॉलम लिखा था. जिसका शीर्षक 'चलें साथ साथ: फॉरवर्ड, वी टुगेदर ' था. जब जनवरी 2015 में ओबामा भारत आए थे तो दोनों ने साथ मिलकर रेडियो कार्यक्रम 'मन की बात' को संबोधित किया था.

सितम्बर 2014 में ओबामा के बुलावे पर प्रधानमंत्री बनने के बाद पहली बार मोदी वाशिंगटन गए थे. ओबामा गेट पर उनके स्वागत के लिए पहुंचे. जहां ओबामा ने मोदी से गुजराती में पूछा 'केम छो'. इसका मतलब 'कैसे हो' होता है. जवाब में मोदी ने ओबामा को शुक्रिया कहा था. दोनों नेता साथ में मॉर्टिन लुथर किंग मेमोरियल भी घुमने गए थे.

 

जनवरी 2015 में ओबामा गणतन्त्र दिवस के मुख्य अतिथि के रूप में भाग लेने आए थे. गणतन्त्र दिवस के एक दिन पहले दोनों नेताओं ने हैदराबाद हाउस के गार्डन में समय बिताया था. इस मुलाकात में मोदी ने ओबामा को चाय सर्व किया था. इस मुलाकात के कई फोटो सामने आए जिसे 'चाय पर चर्चा' का नाम दिया गया. इस दौरान हुए 'मन की बात ' में मोदी ने बराक शब्द का मतलब बताया था. स्वाहिलि भाषा में इसका अर्थ 'जिसपर भगवान की कृपा है' होती है.

ओबामा और मोदी इसके बाद भी कई बार मिले. हर मुलाकात में दोनों के बीच गर्मजोशी ही दिखी. अब देखना होगा क्या यह गरमजोशी ट्रंप के साथ कायम रह पाएगी? मौजूदा हालात को देखें तो ऐसा बिल्कुल भी नहीं लगता है. हाल ही में पेरिस जलवायु समझैते से बाहर होने के बाद ट्रंप के बयान ने दोनों देशों के बीच कड़वाहट पैदा कर दी है. H1-B वीजा को लेकर भी दोनों नेताओं के बीच मतभेद नजर आ रहे हैं. ऐसे में इस दौरे से एक नए रिश्ते की उम्मीद की जा रही है.